पटकथा लेखन ब्लॉग
पर प्रविष्ट किया लेखक विक्टोरिया लूसिया

अपनी पटकथा में पिक्सर के कहानी के नियमों का प्रयोग कैसे करें

करेंअपनी पटकथा में पिक्सर के कहानी के नियमों का प्रयोग

पिक्सर को विकसित किरदारों और कथानकों वाली विचारशील फ़िल्मों के लिए जाना जाता है, जो आपका दिल छू लेती हैं। वो एक के बाद एक मार्मिक सफल फ़िल्में कैसे बना लेते हैं? 2011 में, पिक्सर की पूर्व स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट, एमा कोट्स, ने कहानी के नियमों का एक संग्रह ट्वीट किया था, जो उन्होंने पिक्सर में काम करने के दौरान सीखा था। इन नियमों को "पिक्सर के कहानी के 22 नियम" के रूप में जाना जाता है। आज मैं आपके साथ ये नियम शेयर करने वाली हूँ, और साथ ही यह भी बताऊंगी कि पटकथा लिखते समय मैं उन्हें कैसे प्रयोग करती हूँ।

1. आप किसी किरदार को उसकी सफलताओं के बजाय कोशिशों के लिए ज़्यादा पसंद करते हैं।

दर्शक किसी किरदार के साथ जुड़ना चाहते हैं और उसका समर्थन करना चाहते हैं; वो अपने लक्ष्य हासिल करते हैं या नहीं ये ज़्यादा ज़रुरी नहीं है, बल्कि किरदार का विकसित होना और अपने सफ़र के दौरान सीखना ज़्यादा ज़रुरी है।

2. आपको इस बात को दिमाग में रखना होता है कि दर्शक के रूप में आपको कौन सी चीज़ दिलचस्प लगती है, न कि लेखक के रूप में आपको क्या करने में मज़ा आता है। ये दोनों चीज़ें बहुत अलग हो सकती हैं।

क्या आप अपने लिए लिख रहे हैं? किसी जुनूनी परियोजना के रूप में कहानी लिखने में कोई हर्ज़ नहीं है, जिसे आपका बेचने या बनाने का कोई इरादा नहीं होता। लेकिन अगर आप कोई पटकथा लिख रहे हैं और चाहते हैं कि दूसरे इसे देखें तो इस चीज़ को ध्यान में रखकर लिखें कि आप क्या देखना पसंद करेंगे।

3. विषय के लिए प्रयास करना महत्वपूर्ण है, लेकिन आपको अंत तक पता नहीं चलता कि असल में कहानी किस बारे में है। अब दोबारा लिखें।

अपने पहले ड्राफ्ट में आपको बस अपनी कहानी लिखने पर फोकस करना चाहिए। अगले ड्राफ्ट में, आप विषय के बारे में सोच सकते हैं!

4. एक बार की बात है, ___। हर दिन, ___। एक दिन ___। उसकी वजह से, ___। उसकी वजह से, ___। जब तक कि अंत में, ___।

इस तरीके से अपनी कहानी की गतिविधि को समझाने में समर्थ रहें!

5. सरल बनाएं। फोकस करें। किरदारों को जोड़ें। गोल-गोल घूमने से बचें। आपको लगेगा कि आप ज़रुरी चीज़ें खो रहे हैं, लेकिन यह आपको आज़ाद कर देता है।

अपने किरदारों को दृश्यों में ज़्यादा से ज़्यादा तेज़ी से अंदर और बाहर निकालें। दर्शकों को समझाने के बजाय, उन्हें ख़ुद अंदाज़ा लगाने दें कि क्या हो गया है।

6. आपका किरदार किस चीज़ में अच्छा है, किस चीज़ के साथ सहज है? उनके सामने ठीक उसका उल्टा लाएं। उन्हें चुनौती दें। वो इसका सामना कैसे करते हैं?

संघर्ष और चुनौतियां किसी भी सफल पटकथा की जीवन-शक्ति है। अपने किरदार के रास्ते में बाधाएं लाने पर हमें उसके बारे में क्या पता चलता है? जोखिम बढ़ाना न भूलें और इस बात का ध्यान रखें कि आपकी पटकथा में ऐसा बहुत कुछ हो रहा हो, जिसकी वजह से आपके किरदार को संघर्ष करना पड़ता है।

7. अपनी पटकथा का बीच का भाग सोचने से पहले अंत सोचें। सच में, अंत मुश्किल होता है, अंत के बारे में पहले से सोचकर रखें।

कुछ लेखक पीछे से काम करने का सुझाव देते हैं। अगर आपको अंत पता है तो आप आगे यह पता लगा सकते हैं कि उस तक कैसे पहुंचना है।

8. अपनी कहानी पूरी करें; अगर यह बहुत अच्छी नहीं है तो जाने दें। आदर्श दुनिया में, आपके पास दोनों हैं, लेकिन आगे बढ़िये। अगली बार ज़्यादा अच्छा करिये।

आधी-अधूरी पटकथा के मामले में आप ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते, लेकिन पूरी पटकथा को कभी भी दोबारा लिखा और सुधारा जा सकता है!

9. कहीं अटक जाने पर, यह सूची बनाएं कि आगे क्या नहीं होगा। ऐसा करने पर, कई बार आपको वो सामग्री मिल जाती है, जो आगे बढ़ने में मदद करती है।

यह विचार मंथन की एक बहुत अच्छी तकनीक है। सभी लेखन वास्तविक लेखन नहीं होते। आपकी पटकथा लिखने का एक हिस्सा बस दूसरे संभावित विकल्पों को ख़त्म करना होता है!

10. अपनी मनपसंद कहानियों का विश्लेषण करें। आपको उनमें जो पसंद है, वो आपका एक हिस्सा है; इसे प्रयोग करने में समर्थ होने से पहले आपको इसे पहचानना होगा।

उन फ़िल्मों और पटकथाओं का अध्ययन करने से ज़्यादा अच्छा और कुछ नहीं होता जो आपको प्रेरित करती हैं!

11. इसे पेज पर उतारने पर आप इसे ठीक करना शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आपके दिमाग में कोई बहुत अच्छा विचार है तो आप इसे कभी किसी के साथ शेयर नहीं करेंगे।

यह कोई पटकथा नहीं है, जब तक कि आप इसे किसी के साथ शेयर नहीं कर सकते। कहानियां बताने के लिए बनी होती हैं, इसलिए इसे हमेशा अपने दिमाग में न रखें!

12. अपने दिमाग में आने वाली पहली चीज़ पर विचार न करें। बल्कि दूसरी, तीसरी, चौथी, पांचवीं के बारे में भी न सोचें - ज़ाहिर चीज़ों को रास्ते से हटाएं। ख़ुद को आश्चर्यचकित करें।

ख़ुद को आश्चर्यचकित करने पर अक्सर आप दर्शकों को भी आश्चर्यचकित कर सकते हैं!

13. अपने किरदारों को उनकी अपनी राय दें। लिखते समय दब्बू/कमज़ोर किरदार आपको अच्छा लग सकता है, लेकिन दर्शकों के लिए यह ज़हर होता है।

यहाँ तक कि सबसे दब्बू किरदार का भी अपना एक दृष्टिकोण होता है। अगर आपके किरदार के वहां होने का कोई कारण नहीं है तो शायद उसे वहां होना ही नहीं चाहिए।

14. आपको यह कहानी क्यों बतानी है? आपके अंदर वो कौन सा विश्वास है, जो आपकी कहानी को ताकत दे रहा है। यही आपकी पटकथा का दिल है।

और यही आपकी कहानी को सबसे अलग बनाता है! इसका कारण पता करें कि किसी कहानी के विचार को लेकर आप इतना ज़्यादा क्यों महसूस करते हैं, और इस बात का ध्यान रखें कि वो तर्क पेज से निकलकर इसे पढ़ने वाले को समझ आये।

15. अगर इस परिस्थिति में, आप वो किरदार होते, तो आपको कैसा लगता? ईमानदारी अविश्वसनीय स्थितियों को विश्वसनीयता देती है।

असली बनें! आपकी कहानी के लिए जो सबसे अच्छा है उसके बारे में सोचने के बजाय, ईमानदार बनें। आपकी ईमानदारी कहानी कहने के दरवाज़े खोल देगी और लोग आपके किरदारों से ज़्यादा जुड़ पाएंगे।

16. दांव पर क्या लगा है? हमें आपके किरदार का समर्थन करने का कोई कारण दें। अगर वो सफल नहीं होते तो क्या होगा? उनके लिए सफल होना मुश्किल बनाएं।

अपने किरदार को ऐसा बनाएं कि हम शुरू से ही उसका समर्थन करने के लिए मजबूर हो जाएँ।

17. कोई काम बेकार नहीं जाता। अगर यह काम नहीं कर रहा तो इसे जाने दें और आगे बढ़ें - यह बाद में उपयोगी बन जायेगा।

कुछ भी न लिखना समय की बर्बादी है! जब भी आप लिख रहे होते हैं तो आप बढ़ते हैं और आपमें सुधार होता है!

18. आपको ख़ुद को जानना होगा: जो अपना सर्वश्रेष्ठ करने और परेशान होने के बीच का अंतर है। कहानी चुनौती देती है, आसान नहीं होती।

रुकें। पीछे हटें। बड़ा परिदृश्य देखें। क्या आप किसी विचार को प्रभावी तरीके से रख रहे हैं? हमेशा फीडबैक लें, और बारीकियों में ख़ुद को न खोएं।

19. किरदारों को मुसीबत में डालने के संयोग बहुत अच्छे होते हैं; उन्हें उनसे बाहर निकालने के संयोग धोखेबाज़ी होते हैं।

आपके किरदारों को किस्मत से मुसीबतों से नहीं बचना चाहिए; इसके बजाय इसे ठीक करने के लिए उन्हें काम करने की ज़रुरत होती है। यह अक्सर विकास और बदलाव का स्रोत बन सकता है।

20. अभ्यास: किसी ऐसी फ़िल्म के मूलभूत भाग लें जो आपको पसंद नहीं है। आप उन्हें दोबारा व्यवस्थित करके अपनी पसंद की फ़िल्म में कैसे बदल सकते हैं?

21. आपको अपनी परिस्थिति/किरदारों से जुड़ना होगा; आप बस ऐसे ही 'अच्छा' नहीं लिख सकते। कौन सी चीज़ आपको वैसा करने पर मजबूर करेगी?

असली जीवन की भावनाएं और बातचीत कभी-कभी आपकी पटकथा के दृश्यों के लिए सबसे अच्छा आधार तैयार करती हैं। आख़िरी बार आपने कब अकेलापन, ख़ुशी, जलन, या जुनून महसूस किया था? आपको वैसा क्यों महसूस हुआ था? इसे अपनी पटकथा में डालें।

22. आपकी कहानी का सार क्या है? इसे बताने का सबसे आसान तरीका क्या है? अगर आपको वो पता है तो आप वहां से शुरुआत कर सकते हैं।

सरलता अक्सर बेहतर होती है! आपके नायक/नायिका को बिंदु A से बिंदु C पर ले जाने का सबसे आसान रास्ता क्या है?

मुझे उम्मीद है, नियमों की यह सूची आपके लिए उपयोगी साबित होगी। इन्हें सफल पटकथा लिखने के लिए सख़्त नियम न मानें, बल्कि दिशानिर्देश के रूप में देखें, जो पटकथा में मुश्किल होने पर आपको वापस रास्ते पर लाने में मदद कर सकते हैं। अपनी लिखने की प्रक्रिया को आसान बनाने में और शानदार कहानी के ज़रुरी भागों के बारे में जानने में मदद करने के लिए यह बहुत अच्छा मार्गदर्शक है। लिखने के लिए शुभकामनाएं!

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