पटकथा लेखन ब्लॉग
पर प्रविष्ट किया लेखक कर्टनी मेजरनिच

लेखकों के लिए जीवन और काम में संतुलन कैसे बनाएं

आह, हाथ न आने वाला जीवन और काम का संतुलन। वैसे, इसका मतलब क्या होता है? क्या अपनी ज़िन्दगी में लगातार संतुलन की स्थिति बनाये रख पाना मुमकिन भी है? ज़रुरी नहीं है कि जीवन और काम के बीच का संतुलन हर समय संभव हो, लेकिन अगर आप इसे पा लेते हैं तो यह आपके लिए सबसे अच्छे एहसासों में से एक होता है।

मैं कभी जीवन-काम में संतुलन बना पाती हूँ तो कभी नाकामयाब हो जाती हूँ, लेकिन यह हमेशा मेरे दिमाग में रहता है। मेरे जैसे किसी इंसान के लिए जो अपनी जीविका के लिए लिखने का काम करता है, रचनात्मक और उत्पादक बने रहने के लिए एक स्पष्ट दिमाग रखना ज़रुरी होता है। अगर आपकी ज़िन्दगी अस्त-व्यस्त रहती है तो आपका दिमाग साफ़ तरीके से नहीं सोच सकता। जीवन और काम के बीच संतुलन पाना ज़रुरी है, क्योंकि इससे मुझे अपना तनाव कम करने में, ख़ुद को ज़्यादा स्वस्थ महसूस करने में, और अपने काम पर, घर में, और अपने निजी समय में ज़्यादा उत्पादक बनने में मदद मिलती है। हर दिन सबको अपनी अलग-अलग ज़िम्मेदारियों को संतुलित करना पड़ता है।

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उदाहरण के लिए, पटकथा लेखक रिकी रॉक्सबर्ग को ले लीजिये। लिखना ही उनका काम है, और घर आने पर, उनका एक और बड़ा काम है: अभिभावक बनना।

रॉक्सबर्ग ने हमें बताया, "ख़ैर, मेरे कुछ बच्चे हैं। मैं स्टूडियो में पूरे दिन लिखता हूँ। वो एक तरह से किसी और के लिए होता है।"

वर्तमान में, वो कोई और ड्रीमवर्क्स है। उससे पहले, यह डिज्नी था।

"बाकी सबकी तरह, मैं भी घर आता हूँ, अपने परिवार से मिलता हूँ। लेकिन वो सब सुबह जल्दी उठते हैं। वो सोने चले जाते हैं, और मैं अकेला रह जाता हूँ।"

वो उस दिनचर्या को "अपना-समय" निकालने के लिए इस्तेमाल करते हैं, और वो इस समय में अपनी निजी परियोजनाएं लिखने का काम करते हैं।

अगर आप थोड़े से भी रिकी जैसे हैं तो हर दिन अलग हो सकता है। काम लगातार रहता है, लेकिन आप अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ निभाने के बाद भी अपने लिए समय कैसे निकाल पाते हैं?

यहाँ आपको बताया गया है कि लेखक काम और जीवन के बीच संतुलन कैसे पा सकते हैं:

  1. अपनी प्राथमिकताएं अलग तरीके से निर्धारित करें

    कभी-कभी अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करते समय, हम उस चीज़ के बारे में सोचते हैं जिसे पूरा करने के लिए वास्तव में उस दिन हमारे पास समय होता है। आप अक्सर लेखकों को इसके लिए अपने आउटलुक कैलेंडर पर अलग से समय निकालते हुए देखेंगे। यह ऐसा करने का गलत तरीका नहीं है, लेकिन अगर आपने अपने लिखने के लिए रात 9 बजे का समय निकाला है और तब तक आपकी पूरी ऊर्जा ख़त्म हो जाती है तो क्या होगा? अपने कामों को उस ऊर्जा के आधार पर प्राथमिकता दें, जो उन्हें करने के लिए आपके पास होगी या नहीं होगी।

  2. जानें कि आप कब सबसे ज़्यादा उत्पादक होते हैं

    ऊपर दिए गए बिंदु के संबंध में, अपने काम की सूची को दिन के 24 घंटे के बजाय अपनी ऊर्जा के आधार पर निर्धारित करना, उसके लिए सही अपेक्षाएं करने का बेहतर तरीका है, जो आप संतुलित कर सकते हैं। आप दिन में कब सबसे ज़्यादा उत्पादक होते हैं? उस समय को अपने लिखने के लिए या काम पर ज़्यादा मुश्किल चीज़ों के लिए बचाएँ। क्या आपको घर के कुछ काम करने हैं? वो समय प्रयोग करें जब आपका ध्यान भटकने की सबसे ज़्यादा संभावना होती है। नींद से रिसेट होने की ज़रुरत पड़ने से पहले, हमारी दिमागी क्षमता और रचनात्मकता केवल उतनी ही दूर तक जा सकती है। आप मशीन नहीं हैं।

  3. अपने लिखने का समय निर्धारित करें और उसपर टिके रहें

    अपना लिखने का समय निर्धारित करने पर आपको अनुशासन बनाने में मदद मिलती है, लेकिन इससे आपको अपने लिए और अपने परिवार और दोस्तों के लिए दायरे तय करने की भी अनुमति मिलती है। अगर सभी लोग जानते हैं कि आप सुबह छह से सात बजे तक लिखते हैं तो वो आपको पैनकेक खाने या जिम में नयी स्पिन क्लास आजमाने के लिए बुलाने की कोशिश नहीं करेंगे। आपको मना करने में भी आसानी होगी।

  4. पहले से योजना बनाएं

    अगर आप पहले से योजना बनाने वाले व्यक्ति नहीं हैं तो आपका अपनी प्रतिबद्धताओं को छोड़ने का ज़्यादा मन करेगा। उन प्रतिबद्धताओं में घर का कचरा निकालना या अपनी पटकथा का कोई दृश्य लिखना शामिल हो सकता है। क्या आप उन लोगों को जानते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि वो सबकुछ सही से कर लेते हैं? वो पहले से योजना बनाते हैं! जानें कि कब सामाजिक कार्यक्रम होने वाले हैं, कब बच्चों को फुटबॉल के अभ्यास के लिए जाना है, और कब आपके घर लोग डिनर के लिए आने वाले हैं। उसके बाद, आप इसके आसपास अपने लिखने के समय की योजना बना सकते हैं और फिर भी आपको ऐसा महसूस होगा जैसे दिन में काफी समय था। या, उससे भी अच्छा, उस दिन कुछ न लिखने के बावजूद आपको ठीक महसूस होगा। क्योंकि यही आपकी योजना थी!

  5. तकनीक बंद करें

    यह सबसे बड़ा बिंदु है। जैसे ही हम अपना फोन देखते हैं या बैकग्राउंड में चल रहे पॉडकास्ट की वजह से भटकते हैं, हमारा बहुत सारा समय चला जाता है। फोन बंद करें। उसके बाद आपको यह देखकर हैरानी होगी कि आपको दिन में कितना सारा समय मिलता है।

  6. यथार्थवादी बनें और सोचें

    इस चीज़ को लेकर यथार्थवादी रहें कि आप एक दिन में कितना काम कर सकते हैं, और याद रखें ज़िन्दगी बस कोई चेकलिस्ट नहीं है। इस बात का ध्यान रखें कि आपकी ज़िन्दगी में शांति, अवलोकन, और चिंतन का समय हो। आपका दिन कैसा गया? क्या यह वैसा ही था जैसा आपने सोचा था? कौन सी चीज़ काम की और कौन सी नहीं, और कहाँ आप अपने लक्ष्य से भटके?

  7. मानसिक और शारीरिक आराम की योजना बनाएं

    हमारे शरीर के लिए बैठना कठिन है, और अधिकांश लेखक अपने दिन में ज़्यादातर समय यही करते हैं। सक्रिय रहने के लिए समय निकालें, भले ही वो बस अपने बच्चों के साथ खेलने का ही समय क्यों न हो। इसी तरह हमारे दिमाग को भी ब्रेक की ज़रुरत होती है। अगली बार जब आपको रिचार्ज होने की ज़रुरत पड़े तो पटकथा लेखकों के लिए यह ध्यान आजमाएं।

  8. अपनी छुट्टी लें

    अगर आपको वेतन सहित छुट्टी मिलती है तो इसे ज़रुर लें! ख़ासकर लेखकों के मामले में, संतुलन के लिए छुट्टियां बहुत ज़रुरी हैं। आप किसी बुलबुले में रहकर काम नहीं कर सकते और इसके बाद शानदार विचार आने की उम्मीद नहीं कर सकते। लिखने की कितनी सारी चीज़ें जीने से जुड़ी हैं। अपना छुट्टी का समय निकालने के लिए आपको ढेर सारे पैसों की ज़रुरत नहीं है। आपको कहीं जाने की भी ज़रुरत नहीं है। लेकिन आपको काम के अलावा भी दूसरी चीज़ों के बारे में सोचने की ज़रुरत होती है।

    रॉक्सबर्ग की दिनचर्या उन्हें वो संतुलन देती है, जिसकी उन्हें अपने परिवार, अपने लिखने के निजी समय का आनंद लेने के लिए ज़रुरत है, और फिर भी वो अपनी नौकरी पर पूरी ऊर्जा के साथ काम कर पाते हैं।

"मुझे परिवार के लिए समय मिलता है, मुझे काम के लिए समय मिलता है, और उसके बाद मुझे अपने लिए समय मिलता है, जो मेरा लिखने का समय है," उन्होंने अंत में कहा।

समय निकालने में समय लगता है,

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