पटकथा लेखन ब्लॉग
पर प्रविष्ट किया लेखक कर्टनी मेजरनिच

अपना दूसरा अंक ज़्यादा तेज़ी से कैसे लिखें

अब तक मैं कई बार दूसरे अंक की समस्याओं से बाहर निकलने के बारे में काफी कुछ लिख चुकी हूँ, और जब कभी भी पटकथा लेखक इस विषय पर सलाह देते हैं तो उन सबमें एक चीज़ हमेशा समान होती है:

"हाँ, दूसरा अंक बेकार होता है।"

मैं अब तक ऐसे किसी लेखक से नहीं मिली जिसे अपनी पटकथा का दूसरा अंक लिखना पसंद हो, और उनमें डिज्नी लेखक रिकी रॉक्सबर्ग ("बिग हीरो 6: द सीरीज़," सेविंग सैंटा," "रैपुन्ज़ल्स टैंगल्ड एडवेंचर") भी शामिल हैं, जिन्हें मैंने ऊपर उद्धृत किया है। मैंने उनसे दूसरे अंक की चुनौतियों से बाहर निकलने के लिए कुछ उपाय देने के लिए कहा, और उनके मुंह से निकला, "हे भगवान।" इसलिए अगर आपके दिल में भी ऐसी ही भावना आती है तो आप अकेले नहीं हैं।

"दूसरे अंक के खतरनाक लगने का कारण यह है कि वो बाकी सभी अंकों से दोगुना लम्बा होता है," उन्होंने मुझे बताया। "इसलिए, मैं अपने दूसरे अंक को वर्गीकृत कर देता हूँ। मैं इसे दो अलग-अलग अंकों में विभाजित करता हूँ, तो यह अंक 2A, अंक 2B जैसा हो जाता है।"

मैंने इस तरकीब के बारे में पहले भी सुन रखा है, लेकिन रिकी इसे एक कदम आगे ले जाते हैं।

"इसके बाद, मैं उनमें से प्रत्येक को आधा कर देता हूँ, इस तरह, मानसिक रूप से, मैं इसे उस पटकथा के अंदर एक छोटी पटकथा लिखने जैसा मानता हूँ, और इसकी वजह से यह काफी कम डरावना लगता है," उन्होंने कहा। "आप अपने दूसरे अंक के पहले आधे भाग की शुरुआत और दूसरे अंक के दूसरे आधे भाग की शुरुआत के बारे में सोच सकते हैं, इस तरह से कि जैसे, दस पेज यहां, दस पेज वहां।"

दूसरे अंक के खतरनाक लगने का कारण यह है कि वो बाकी सभी अंकों से दोगुना लम्बा होता है। इसलिए, मैं अपने दूसरे अंक को वर्गीकृत कर देता हूँ। मैं इसे दो अलग-अलग अंकों में विभाजित करता हूँ, तो यह अंक 2A, अंक 2B जैसा हो जाता है। इसके बाद, मैं उनमें से प्रत्येक को आधा कर देता हूँ, इस तरह, मानसिक रूप से, मैं इसे उस पटकथा के अंदर एक छोटी पटकथा लिखने जैसा मानता हूँ, और इसकी वजह से यह काफी कम डरावना लगता है।
रिकी रॉक्सबर्ग
पटकथा लेखक

इस बात का ध्यान रखने के लिए कि आपके दूसरे अंक में काफी कुछ हो रहा हो, आप इन तत्वों का प्रयोग भी कर सकते हैं, जिन्हें माइकल शिल्फ़ ने द स्क्रिप्ट लैब के एक पुराने लेकिन उपयोगी पोस्ट में बताया है:

बाधाएं

मुझे यक़ीन है आपने ऐसे दूसरे अंक देखे होंगे जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि उन्हें जबरदस्ती खींचा गया है। इससे बचने के लिए, इस बात का ध्यान रखें कि आपके दूसरे अंक में काफी कुछ चल रहा हो। दूसरा अंक बस बाधाओं पर केंद्रित होता है। हर घटनाक्रम किसी बाधा पर केंद्रित होना चाहिए जो आपके मुख्य किरदार को अपने लक्ष्य तक पहुँचने से रोकता है, और ये बाधाएं ज़्यादा से ज़्यादा मुश्किल होती जानी चाहिए।

पहले प्रयास

आपका मुख्य किरदार अपने रास्ते पर निकल चुका है और अब उसे अपनी समस्या सुलझाने की कोशिश करने की ज़रुरत है। शुरू में, वो कुछ आसान करने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन, ज़ाहिर तौर पर, इसमें नाकामयाब हो जाते हैं।

पहले प्रयासों के परिणाम

आपके मुख्य किरदार ने पहले जो कुछ भी करने की कोशिश की थी उसकी वजह से चीज़ें केवल और ज़्यादा खराब हुई हैं।

B और C कथानक

अपने उप-कथानकों को दूसरे अंक में लाएं, जिन्हें मुख्य तनाव के साथ जुड़ना चाहिए और मुख्य किरदार की भावनाओं को और ज़्यादा उजागर करना चाहिए।

पहला चरम बिंदु

आपकी फ़िल्म का पहला चरम बिंदु फ़िल्म के बीच में आता है। शैली के आधार पर, मुख्य किरदार ने या तो कुछ कोशिश की है और थोड़ी सफलता का अनुभव किया है या फिर अपने सबसे बुरे दौर में हैं।

मिडपॉइंट मिरर और कॉन्ट्रास्ट

यह याद रखें कि आपकी फ़िल्म का मिडपॉइंट – चाहे यह जीत हो या हार – आपकी फ़िल्म के निष्कर्ष में प्रतिबिंबित होना चाहिए। दूसरा अंक ख़त्म होने से पहले, आप अपने मिडपॉइंट का विरोध करना चाहेंगे। अगर यह जीत थी तो इसका विपरीत हार होगा, और अगर यह हार थी तो इसका विपरीत जीत होगा।

और ज़्यादा प्रयास

अब जबकि मुख्य किरदार को पता चल गया है कि क्या नहीं करना है तो वो समस्या को सही से सुलझाने की कोशिश करेंगे।

किरदार का आर्क, भाग 2

आपने पहले अंक में अपने किरदार की कमी के बारे में बता दिया था, इसलिए दूसरे अंक में, इस बात का ध्यान रखें कि आप उस कमी को दूर करने के लिए किरदार के प्रयासों को शामिल करना न भूलें। आपका किरदार अपने व्यक्तिगत सफर में कहाँ जा रहा है? यह आपके आर्क का मध्य होता है।

मुख्य चरम बिंदु

मुख्य चरम बिंदु वो मोड़ होता है जहाँ ऐसा लगता है कि सबकुछ ख़त्म हो गया है।

पहला संकल्प

मुख्य किरदार मुख्य चरम बिंदु को सुलझा देता है, लेकिन अंक तीन में अपने लक्ष्य तक पहुँचने में अभी भी एक कदम बाकी है, और फिर तीसरा अंक शुरू होता है…

"अचानक, यह ऐसा नहीं रह जाता कि 'हे भगवान, यह कितना लम्बा है।' बल्कि ऐसा हो जाता है कि 'हे भगवान, यह कितना छोटा है। मैं यह कैसे करूँ?'" रिकी ने कहा। "मुझे लगता है यह आपके दूसरे अंकों को ज़्यादा गतिशील और कम डरावना बनाता है।"

मुझे अभी से अच्छा महसूस होने लगा है,

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