पटकथा लेखन ब्लॉग
पर प्रविष्ट किया लेखक विक्टोरिया लूसिया

3-अंक की संरचना के उदाहरण

मुझे स्टोरीटेलिंग के लिए कौन सी संरचना प्रयोग करनी चाहिए? यह सवाल हर लेखक ख़ुद से ज़रूर पूछता है! दुनिया के साथ अपनी कहानी साझा करने के लिए कौन सी संरचना सबसे अच्छी रहेगी? 3-अंक की संरचना कहानी कहने की सबसे पुरानी और सबसे आम संरचनाओं में से एक है। अरस्तू का ग्रंथ पोएटिक्स उनके इस विश्वास के बारे में बताता है कि कहानी की संरचना में मुख्य रूप से शुरुआत, मध्य, और अंत होता है। क्या 3-अंक की संरचना इतनी सरल है? जी हाँ! ज़्यादा जानने के लिए आगे पढ़ें और 3-अंक की संरचना के कुछ उदाहरण देखें!

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3-अंक की संरचना के उदाहरण

आप 3-अंक की कहानी की संरचना कैसे लिखते हैं?

3-अंक की संरचना का प्रयोग पटकथाएं, शॉर्ट स्टोरीज़, उपन्यास, और यहाँ तक कि नॉन-फिक्शन रचनाएं लिखने के लिए भी किया जा सकता है! 3-अंक की संरचना का प्रयोग करके कहानी लिखना कहानी की किसी भी दूसरी संरचना से ज़्यादा अलग नहीं है। इसके लिए भी आपको वैसे ही योजना बनानी पड़ती है और उन्हीं लिखने से पहले के चरणों से गुज़रना पड़ता है जो आप किसी भी दूसरी कहानी के साथ करते हैं। 3-अंक की संरचना के बारे में जो चीज़ समझनी ज़रूरी है वो है, आपकी शुरुआत, मध्य और अंत के बीच के वर्णन की आवश्यकता।

3-अंक की संरचना का क्या क्रम है?

अरस्तू का मानना था कि सभी कहानियां शुरुआत, मध्य और अंत में विभाजित होती हैं। और मूल रूप से 3-अंक की संरचना बस यही है! अंक 1 शुरुआत है, अंक 2 मध्य है, और अंक 3 अंत है! पटकथा लेखक सिड फील्ड ने अरस्तू के इस सिद्धांत को लिया और इसे पटकथा लेखन के लिए विशेष बना दिया। उन्होंने इन 3 अंकों को नाम दिया है: सेटअप, टकराव और समाधान।

  • सेटअप

    इस अंक के दौरान, कहानी के किरदारों और दुनिया का परिचय दिया जाता है। इसमें कहानी की प्रेरक घटना होती है और कहानी को अंक 2 में ले जाती है, जो एक ऐसा संघर्ष है जो नायक की राह को बदलकर उसे एक नए रास्ते पर ले जाता है।

  • टकराव

    कहानी के मध्य में ऐसी बाधाएं होनी चाहिए जो जोखिमों को बढ़ा देती हैं। यह अक्सर सबसे लंबा अंक होता है। यहाँ एक मध्य बिंदु या मोड़ होना चाहिए, जो अक्सर भाग्य पलटने के रूप में काम करता है और नायक को अपने लक्ष्यों से और ज़्यादा दूर कर देता है।

  • समाधान

    संकट एक चरम पर पहुंच जाता है, जो कहानी की गतिविधि का सबसे ऊँचा बिंदु होता है। कहानियां ख़त्म होने के साथ-साथ गतिविधि कम होती है।

आम तौर पर, 3-अंक की कहानी में कितने कथानक बिंदु होते हैं?

किसी सामान्य 3-अंक की कहानी में कथानक बिंदुओं की संख्या इसके आधार पर अलग-अलग हो सकती है कि आप किसके संरचना के मॉडल को देख रहे हैं। कुछ लोग कहेंगे कि 3-अंक की कहानी में 5, 8, 9, या उससे ज़्यादा कथानक बिंदु होते हैं। मैं जिन मुख्य कथानक बिंदुओं का उल्लेख करने वाली हूँ वो हैं:

  • अंक 1
    • प्रदर्शन: कहानी के सेटअप (किरदार, दुनिया) का परिचय देता है।
    • प्रेरक घटना: वह संघर्ष जो नायक के जीवन की दिशा बदल देता है।
    • कथानक का पहला बिंदु: अक्सर इस बिंदु से कोई वापसी नहीं होती, नायक अपने सफ़र पर चलने के लिए मजबूर हो जाता है। यह कथानक बिंदु हमें अंक 2 में ले जाता है।
  • अंक 2
    • बढ़ती हुई गतिविधि: नायक को बड़ी चुनौतियां या बाधाएं दिखाई देने लगती हैं।
    • मध्य: जोखिम बढ़ रहे हैं, और नायक को अब तक की सबसे बड़ी नाकामयाबी या कहानी के मोड़ का सामना करना पड़ता है।
    • कथानक का दूसरा बिंदु: नायक को कुछ ऐसा पता चलता है जो उन्हें उत्साहित करता है।
  • अंक 3
    • सबसे बुरा समय: नायक अपनी सबसे बड़ी बाधा को दूर करने या दुश्मन का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन उसे अपनी सबसे बड़ी असफलता का सामना करना पड़ता है। कोई उम्मीद नहीं है। नायक कैसे जीत सकता है?
    • क्लाइमेक्स: गतिविधि का सबसे ऊँचा बिंदु। सभी बाधाओं के विरुद्ध, नायक वो सब प्रयोग करता है जो उसने उन्हें पार करने के लिए सीखा है।
    • अंतिम परिणाम: नायक ने अपना संघर्ष ख़त्म कर दिया है, और समाधान तक पहुंच गया है। कथानक पूरे हो गए हैं।

क्या सभी फ़िल्में 3-अंक की संरचना का पालन करती हैं?

हालाँकि, 3-अंक की संरचना बेहद लोकप्रिय है, फिर भी सभी फ़िल्में इसका पालन नहीं करती हैं। फ़िल्में स्टोरीटेलिंग की कई अन्य संरचनाओं का प्रयोग करती हैं, जैसे हीरो का सफ़र, पांच-अंक की संरचना, या अरैखिक संरचना। 3-अंक की संरचना के अलावा किसी अन्य चीज़ का प्रयोग करने वाली फ़िल्मों के कुछ उदाहरणों में "मेमेंटो," "पल्प फिक्शन," और "द ट्री ऑफ़ लाइफ़" शामिल हैं। चूँकि, 3-अंक की संरचना की प्रकृति शुरुआत, मध्य और अंत पर आधारित है, इसलिए कई फ़िल्मों को इस तरह से विभाजित किया जा सकता है, भले ही उन्हें 3-अंक के इरादे से न लिखा गया हो।

क्या टीवी शो 3-अंक की संरचना का पालन करते हैं?

फ़िल्मों की तरह ही, कुछ टीवी शोज़ भी 3-अंक की संरचना के साथ लिखे गये हैं, और कुछ नहीं लिखे गए हैं। किसी टीवी शो को लिखने के लिए किस संरचना का प्रयोग किया जाएगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रत्येक एपिसोड की लम्बाई कितनी है, शो को कौन से प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया जाता है, और शो का पूरा फॉर्मेट क्या है। कमर्शियल ब्रेक के साथ आने वाले घंटे भर के नाटकों को अक्सर 4 या 5 अंकों में लिखा जाता है। वहीं आधे घंटे के सिटकॉम अक्सर 3-अंक में लिखे जाते हैं।

क्या शॉर्ट स्टोरीज़ 3-अंक की संरचना का पालन करती हैं?

अपने फ़िल्म और टेलीविज़न समकक्षों की तरह ही शॉर्ट स्टोरीज़ भी 3-अंक की संरचना का पालन कर सकती हैं या नहीं कर सकती हैं। चूँकि, 3-अंक की संरचना लेखन के कई रूपों में लोकप्रिय है, इसलिए आपको ऐसी बहुत सारी शॉर्ट स्टोरीज़ मिलेंगी जो इनका प्रयोग करती हैं। आपको बहुत ज़्यादा वर्णनात्मक संरचना के बिना भी शॉर्ट स्टोरीज़ मिल सकती हैं या ऐसी शॉर्ट स्टोरीज़ मिल सकती हैं जो कई अन्य वर्णनात्मक संरचनाओं में से एक का प्रयोग करती हैं।

फ़िल्मों में 3-अंक की संरचना के उदाहरण

अब जबकि हमने यहाँ 3-अंक की संरचना के बारे में इतनी सारी बातें कर ली हैं तो हम इसे कहाँ देख सकते हैं? 3-अंक की संरचना का पालन करने वाली पटकथाओं के कुछ अच्छे उदाहरण हैं:

3-अंक की संरचना के बारे में बस इतना ही! उम्मीद है, इस ब्लॉग से आपको 3-अंक की संरचना के बारे में ज़्यादा जानने में मदद मिली होगी और साथ ही आप समझ पाए होंगे कि कौन सी चीज़ इसे कहानियां बताने का इतना लोकप्रिय तरीका बनाती है।

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