पटकथा लेखन ब्लॉग
पर प्रविष्ट किया लेखक विक्टोरिया लूसिया

हॉलीवुड कैसे काम करता है?

हॉलीवुड कैसे काम करता है?

क्या आपने कभी कोई फ़िल्म या टीवी शो देखते समय यह सोचा है कि इसे कैसे बनाया गया होगा? इससे मेरा कोई बुरा मतलब नहीं है कि, "यह कैसे बन गया?!", बल्कि मेरा सवाल काफी हद तक इसके पूरे निर्माण के बारे में है। कैसे कोई फ़िल्म या टीवी शो कल्पना से लेकर पूर्णता तक पहुंचता है? हॉलीवुड कैसे काम करता है, यह जानने के लिए कृपया आगे पढ़ें!

अपनी जगह पर बने रहें! हम जल्द ही सीमित संख्या में बीटा टेस्टरों के लिए SoCreate का पटकथा लेखन सॉफ्टवेयर लॉन्च करने वाले हैं। इस पेज से बाहर निकले बिना,

सबसे पहले, किसी फ़िल्म या टीवी शो का निर्माण एक लंबी-चौड़ी प्रक्रिया है, जिसमें बहुत सारे चरण होते हैं जिन्हें पूरा करने में वर्षों लग सकते हैं। हालाँकि, फ़िल्म और टेलीविज़न अलग-अलग माध्यम हैं, फिर भी आपको इनमें काफी समानताएं दिखाई देंगी क्योंकि, मूल रूप से, उनका निर्माण तीन विशेष चरणों में होता है: प्री-प्रोडक्शन, प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन। आप फ़िल्म और टेलीविज़न के निर्माण की भिन्नता के लिए उन निर्णयों और प्रक्रियाओं को ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं, जो उस विशेष माध्यम में सबसे अच्छे से काम करने के लिए अलग-अलग होती हैं।

हॉलीवुड में फ़िल्म कैसे बनाई जाती है

आम तौर पर, फ़िल्म बनाने के लिए निर्माण के पांच चरण होते हैं।

विकास

फ़िल्म निर्माण के शुरुआती चरण को विकास कहा जाता है। फ़िल्मों की शुरुआत अलग-अलग हो सकती है, इसलिए यह चरण हर फ़िल्म के लिए अलग दिखाई दे सकता है। इस चरण में मूल रूप से अवधारणा और लेखन को पूरा किया जाता है और उसके बाद ज़्यादातर फ़िल्मों के लिए पटकथा को संशोधित किया जाता है। इस चरण में, लेखक या निर्देशक द्वारा निर्माताओं के सामने परियोजना के बारे में बताना और यह पता लगाना भी शामिल हो सकता है कि फ़िल्म के लिए पैसे कहाँ से आएंगे।

प्री-प्रोडक्शन

प्री-प्रोडक्शन चरण तब शुरू होता है जब एक स्टूडियो पहले से विकसित की गयी चीज़ों पर आगे बढ़ने के लिए हरी बत्ती दिखाता है। प्री-प्रोडक्शन में यह योजना शामिल होती है कि फ़िल्म की शूटिंग कैसे होगी। उसके बाद, टीम शूटिंग स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देगी, बजट का पता लगाएगी, वित्तपोषण की पुष्टि करेगी और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करेगी। वो प्रमुख अभिनेताओं को कास्ट करेंगे, फोटोग्राफी के निर्देशक और सहायक निर्देशकों को नियुक्त करेंगे, और कॉस्ट्यूमिंग एवं प्रॉप के लिए विभाग प्रमुखों को असाइन करेंगे। वो यह सुनिश्चित करने के लिए एक लाइन निर्माता भी नियुक्त करेंगे कि निर्देशक के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रत्येक विभाग को क्या लाने की ज़रूरत है। टीम फिल्मांकन की जगह का पता लगाएगी, एक शूटिंग शेड्यूल बनाएगी और निर्धारित करेगी कि सेट पर हर दिन कौन से उपकरणों की ज़रूरत पड़ेगी।

प्रोडक्शन

प्रोडक्शन को मुख्य फोटोग्राफी के रूप में भी जाना जाता है, और यह तब होता है जब फिल्मांकन शुरू हो जाता है। फ़िल्म निर्माण के दौरान दो प्रमुख लक्ष्य? शेड्यूल पर टिके रहें और बजट पर बने रहें, और यह कहना आसान है लेकिन करना बहुत मुश्किल! प्रोडक्शन के दौरान क्रू भी साथ आता है, जैसे स्क्रिप्ट सुपरवाइज़र, कॉस्ट्यूमर्स, मेकअप आर्टिस्ट, फ़िल्म और साउंड एडिटर, इत्यादि। प्रोडक्शन कोऑर्डिनेटर इस बात का ध्यान रखकर सेट की दिन-प्रतिदिन की बारीकियों पर नज़र रखता है कि बिलिंग और कैटरिंग ट्रैक पर रहे। क्रू शेड्यूल और शूटिंग की योजना के अनुसार फुटेज शूट करता है।

पोस्ट-प्रोडक्शन

मुख्य फोटोग्राफी पूरी हो जाने के बाद, फ़िल्म पोस्ट-प्रोडक्शन में प्रवेश करती है। संपादक फुटेज को एक साथ लाकर फ़िल्म को जोड़ते हैं। पोस्ट-प्रोडक्शन टीम संगीत, ध्वनि और दृश्य प्रभाव जोड़ेगी। ज़रूरत पड़ने पर इस चरण के दौरान वॉइस-ओवर या ऑटोमेटेड डायलॉग रिप्लेसमेंट का काम पूरा किया जाता है।

वितरण

फ़िल्म पूरी होने के बाद, किसी को इसे दुनिया में लाना पड़ता है! फ़िल्म को एक वितरक की ज़रूरत होती है। वितरण की वजह से ही फ़िल्म सिनेमाघरों में, डीवीडी पर, या किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर आती है। कोई व्यक्ति फ़िल्म कहाँ देख सकता है, यह वितरण की डील की बारीकियों पर निर्भर करता है। वितरण कंपनी फ़िल्म की मार्केटिंग भी करती है।

फ़िल्म के पैमाने के आधार पर कुछ फ़िल्मों के लिए ये चरण अलग दिख सकते हैं। कुछ फ़िल्मों में ये चरण एक-दूसरे में मिल सकते हैं, लेकिन सभी फ़िल्मों में इन चरणों का कोई न कोई रूप ज़रूर होता है।

टेलीविज़न निर्माण

टेलीविज़न शो में भी फ़िल्म के समान ही चरण होते हैं, लेकिन ख़ासकर प्री-प्रोडक्शन के मामले में, यह आगे और विभाजित होता है।

पिचिंग

लेखक, निर्माता, या मैनेजर किसी स्टूडियो के लिए कोई शो पिच करेंगे, और अगर उन्हें स्टूडियो का समर्थन प्राप्त होता है, तो वो किसी नेटवर्क या स्ट्रीमिंग सेवा के लिए पिच करेंगे। कभी-कभी निर्माता स्टूडियो को छोड़कर सीधे नेटवर्क के पास जा सकता है, लेकिन ऐसा तभी होता है जब निर्माता मशहूर और सफल हो।

नोट

स्टूडियो और नेटवर्क दोनों ही शो में नोट्स देंगे। एक पिच काफी हद तक बदल सकती है और उस चीज़ में रूपांतरित हो सकती है, जिसे नेटवर्क प्रारंभिक विचार से ज़्यादा चाहता है। ऐसा बहुत कम ही होता है कि इस चरण से बाहर निकलने वाला शो वैसा ही हो जैसा रचनाकार ने सोचा था।

रूपरेखा और स्क्रिप्ट

जब कोई नेटवर्क किसी पिच को स्वीकार करता है तो निर्माता यह सुनिश्चित करने के लिए एक रूपरेखा विकसित करेगा कि हर कोई अवधारणा से सहमत है या नहीं। अगर वो सहमत नहीं हैं, तो निर्माता रूपरेखा को और विस्तृत करेगा और पायलट स्क्रिप्ट लिखेगा। स्टूडियो और नेटवर्क स्क्रिप्ट की समीक्षा करेंगे, इसे अपने नोट्स के साथ वापस करेंगे, और फिर लेखक ड्राफ्ट को संशोधित करेगा।

हरी झंडी

जब नेटवर्क फिल्मांकन के लिए किसी पायलट को मंजूरी दे देता है, तो वो एक शोरनर (अक्सर शो का निर्माता और लेखक) और निर्माता को नियुक्त करेगा। शोरनर शो का मुख्य कार्यकारी निर्माता होता है; वो स्क्रिप्ट पर अतिरिक्त लेखकों के साथ काम करता है, अभिनेताओं को कास्ट करता है और इसके रचनात्मक दृष्टिकोण के लिए संपूर्ण रूप से ज़िम्मेदार होता है। निर्माता एक निर्देशक, क्रू और लेखकों को काम पर रखने में मदद करता है। फिल्मांकन के लिए स्क्रिप्ट को या तो फिर से लिखा जाता है या अपडेट किया जाता है। उसके बाद, एक पायलट एपिसोड बनाया जाता है।

सीरीज़ बनानी है या नहीं

पायलट पूरा होने के बाद, नेटवर्क इसकी समीक्षा करता है और फैसला करता है कि वो शो के लिए पूरी सीरीज़ बनाना चाहते हैं या नहीं। अगर वो ऐसा चाहते हैं तो शो निर्माण में चला जाता है। अगर वो ऐसा नहीं चाहते तो अक्सर शो का सफ़र यहीं पर ख़त्म हो जाता है।

उफ़! ये जानकारी बहुत ज़्यादा है। और, ज़ाहिर तौर पर, हॉलीवुड के काम करने का तरीका ऊपर सरल शब्दों में दी गयी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है। रचनाकार के प्रारंभिक विचार और उस विचार के फलने-फूलने के बीच बहुत सारी अलग-अलग चीज़ें होती हैं, लेकिन आम तौर पर, यही वो मुख्य चरण हैं जिनसे किसी आईडिया को गुज़रना पड़ता है ताकि वो किसी तरह के स्क्रीन पर दिखाई दे सके। भले ही आप कागज़ पर पेन नहीं चला रहे होते हैं, फिर भी उन सभी चरणों में नए लेखकों के लिए नौकरी पर सीखने के अवसर मौजूद हैं, इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि ये कैसे काम करता है। लिखने के लिए शुभकामनाएं!

आपको इसमें भी दिलचस्पी हो सकती है...

खोजे जाएँ पटकथा लेखक के रूप में

पटकथा लेखक के रूप में कैसे खोजे जाएँ

पटकथा लिखने वाले कई महत्वाकांक्षी लोग हॉलीवुड में पटकथा लेखक बनने का सपना देखते हैं। मान लीजिये, आपका सपना भी यही है। ऐसे में, आपके पास निम्नलिखित होने की संभावना है – फ़िल्म या टेलीविज़न के लिए पक्का जुनून, कई पूरी की गयी पटकथाएं जिन्हें आप दुनिया के सामने लाने के लिए बेताब हैं, और अपने मन में करियर से जुड़े लक्ष्य जिन्हें आप अपने लेखन के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। आपको लगता है कि आप सही रास्ते पर जा रहे हैं! लेकिन सफलता के नुस्खे में एक अप्रत्यक्ष चीज़ भी शामिल है: इंडस्ट्री में घुसना! मैं इस इंडस्ट्री में कैसे आऊं? पटकथा लेखक के रूप में खोजे जाने के तरीकों के बारे में सुझाव पाने के लिए आगे पढ़ें...
‘Stranger Things’ Showrunner's Assistant Explains Other Jobs for Aspiring Screenwriters

स्ट्रेंजर थिंग्स के एसए महत्वाकांक्षी पटकथा लेखकों के लिए वैकल्पिक कामों के बारे में बताते हैं

अगर आपके पटकथा लेखन के करियर ने अभी तक रफ़्तार नहीं पकड़ी है, और अगर आपको अभी भी अपनी डे जॉब करने की जरूरत है तो किसी संबंधित क्षेत्र में या पटकथा लेखन से संबंधित कोई काम करना आपके लिए अच्छा रहेगा। इससे खेल में आपका दिमाग लगा रहता है, समान विचारधारा वाले लोगों के साथ संबंध बनाने की अनुमति मिलती है, और इस तरह से आप फिल्म और टेलीविज़न बिज़नेस के बारे में ज्यादा सीख सकते हैं। उदाहरण के लिए, कैटलिन श्नाइडर को ही ले लीजिये। वह अपने नाम के साथ कई पुरस्कार जोड़ने वाली पटकथा लेखिका हैं, साथ ही उन्हें मूवीमेकर मैगज़ीन के टॉप 25 पटकथा लेखकों में भी...
Screenwriting Consultant Danny Manus Gives Script Writers 5 Must-Have Business Tips

पटकथा लेखन परामर्शदाता डैनी मानस पटकथा लेखकों को व्यवसाय के 5 ज़रुरी सुझाव देते हैं

पटकथा लेखन परामर्शदाता डैनी मानस पूर्व विकास कार्यकारी हैं, इसलिए वो पटकथा लेखन की दुनिया के दूसरी तरफ़ रह चुके हैं। अब वो अपनी ख़ुद की नो बुलस्क्रिप्ट कंसल्टिंग नामक परामर्श कंपनी चलाते हैं, ताकि वो पटकथा लेखकों को वो चीज़ें सीखा सकें जो फ़िल्म जगत में सफल करियर बनाने के लिए उनके लिए जानना बहुत ज़रुरी है। और यहाँ एक इशारा है: यह केवल पटकथा के बारे में नहीं होता। उनकी चेकलिस्ट सुनें और काम पर लग जाएँ! मानस ने कहा, "जहाँ तक व्यवसाय की बात है, यह बस दोनों तरफ़ के व्यवसाय के बारे में ज़्यादा जानने से जुड़ा हुआ है। बातचीत करने के लिए हर चीज़ का 30 सेकंड...