पटकथा लेखन ब्लॉग
पर प्रविष्ट किया लेखक विक्टोरिया लूसिया

अनोखी कहानी बताने के लिए कहानी कहने की सांस्कृतिक तकनीकों का इस्तेमाल कैसे करें

अनोखी कहानी बताने के लिए कहानी कहने की सांस्कृतिक तकनीकों का इस्तेमाल

कहानी कहने की कला हम जो हैं उसका मूलभूत आधार है, लेकिन हम विविध और अलग हैं। हमारी अलग-अलग संस्कृतियां हमारे जीवन पर गहरा असर डालती हैं, और, इसकी वजह से, हमारे कहानियां बताने के तरीके में भी बदलाव आता है। संस्कृति न केवल यह निर्धारित करती है कि हम कौन सी कहानियां बताते हैं, बल्कि यह भी निर्धारित करती है कि हम उन्हें कैसे बताते हैं। दुनिया भर में कहानी कहने की कला की तकनीकें कैसे अलग हैं? अलग-अलग देश अपनी कहानियों में किन चीज़ों को अहमियत देते हैं? आज मैं आपको बताने वाली हूँ कि अलग-अलग देश किस तरह से फ़िल्म और टेलीविज़न में संस्कृति का प्रयोग करते हैं।

नायक

हॉलीवुड के फ़िल्म बाज़ार में नायक वाली कहानी पूरी तरह से हावी है, जहाँ वो नायक अक्सर एक्शन से भरपूर किसी कॉमिक बुक की तरह अच्छी लड़ाई लड़ता है। 9/11 के बाद, सुपरहीरो वाली फ़िल्म हॉलीवुड का मानक बन गयी थी। पहले के ज़माने में, सुपरहीरो वाली फ़िल्में काफी सरल होती थीं, लेकिन 9/11 के बाद, ये ज़्यादा डार्क, ज़्यादा जटिल होने लगीं, और इन्हें ज़्यादा से ज़्यादा यथार्थवादी बनाया जाने लगा। ये फ़िल्में इतनी लोकप्रिय हुईं कि आज जब हम फ़िल्मों में नायकों की बात करते हैं तो अमेरिकी लोग अक्सर कैप्टन अमेरिका या आयरन मैन जैसे सुपरहीरो के बारे में सोचने लगते हैं।

दूसरे देशों की फ़िल्में देखना और यह देखना कि उनमें नायक कैसे होते हैं, काफ़ी दिलचस्प होता है। अक्सर दूसरे देश नायक के कम शारीरिक और ज़्यादा नैतिक रूपों का चुनाव करते हैं। उदाहरण के लिए, "द किंग्स स्पीच" किंग जॉर्ज VI को आगे बढ़ते हुए और निराशाजनक संभावनाओं के ख़िलाफ़ खड़े होने का साहस रखते हुए दिखाती है।

कॉमेडी

संस्कृति कॉमेडी और उन चीज़ों को बहुत प्रभावित करती है, जिन्हें मज़ेदार माना जाता है। जिन चीज़ों पर अमेरिकी लोगों को हंसी आती है, ज़रुरी नहीं है कि उनपर दक्षिण कोरिया के लोगों को हंसी आये। अगर आप हाल के सालों में चीन के बॉक्स ऑफिस इतिहास पर नज़र डालें तो बड़ी हॉलीवुड एक्शन फ़िल्में अक्सर बहुत अच्छा प्रदर्शन करती हैं, लेकिन अमेरिकी कॉमेडी फ़िल्में शायद ही कभी चलती हैं। इसके बजाय, चीन की अपनी स्थानीय कॉमेडी फ़िल्में अच्छा प्रदर्शन करती हैं, जो कॉमेडी और संस्कृति के बीच के महत्वपूर्ण रिश्ते को दर्शाता है।

क्या आपने डिज्नी की "मुलान" की लाइव-एक्शन रीमेक देखी है? आप देखेंगे कि उसमें से असली एनिमेटेड फ़िल्म के सभी कॉमेडी वाले हिस्सों को हटा दिया गया है, और चीनी युद्ध की नायिका, मुलान, की कहानी कहीं ज़्यादा गंभीर है। शायद इसका अमेरिकी हास्य चीनी दर्शकों को पसंद न आया होता।

आकांक्षा और पलायनवाद

नाइजीरिया के बाहर रहने वाले बहुत सारे लोगों को शायद यह नहीं पता कि वहां कि फ़िल्म इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ रही है। नॉलीवुड के नाम से जानी जाने वाली नाइजीरिया की फ़िल्म इंडस्ट्री कृषि के बाद सबसे ज़्यादा रोजगार देने वाली इंडस्ट्री है। नॉलीवुड अक्सर पारस्परिक संबंधों पर केंद्रित कॉमेडी और ड्रामा निर्मित करता है, जो शादी, सास के साथ झगड़े, धोखे, और छल जैसे विषय पेश करते हैं। 2018 में अत्यधिक गरीबी में रहने वाले सबसे ज़्यादा लोगों वाले देश के मामले में भारत से आगे निकलने के बावजूद, नयी नॉलीवुड फ़िल्में अक्सर अमीर नाइजीरियन लोगों की संपन्नता दिखाती हैं, जिससे पता चलता है कि पलायनवाद और धन की आकांक्षा नॉलीवुड फ़िल्मों के अंदर महत्वपूर्ण विषय बन रहे हैं।

गति

हॉलीवुड फ़िल्में अपनी तेज़ गति के लिए जानी जाती हैं, और शायद ही कभी फ़िल्मों के दृश्य धीमे होते हैं। असल में, अमेरिकी पटकथा लेखकों को जल्दी से जल्दी दृश्य से अंदर और बाहर जाना सिखाया जाता है! वहीं, दूसरे देशों की फ़िल्में अक्सर धीमी गति की होती हैं। उदाहरण के लिए, मैक्सिकन ड्रामा "रोमा" को ही देख लीजिये, इतनी प्रशंसित फ़िल्म होने के बावजूद, इसकी आलोचना में मैंने अमेरिकी आलोचकों को यह कहते देखा है कि इसकी गति बहुत धीमी है, और दृश्य बहुत लंबे हैं। शायद अमेरिका में तेज़ गति को इसलिए ज़्यादा अहमियत दी जाती है क्योंकि यहाँ पर समय पैसा है, और लोग जल्द से जल्द जानकारी पाना चाहते हैं। साथ ही, दूसरी संस्कृतियों में संचार के तरीके भी अलग होते हैं, और यह उनकी फ़िल्मों की गति में दिखाई देता है।

नाच-गाना

जहाँ हॉलीवुड फ़िल्मों को अक्सर अपने एक्शन के लिए जाना जाता है, वहीं बॉलीवुड फ़िल्में अक्सर अपने नाच-गाने के लिए जानी जाती हैं। बॉलीवुड फ़िल्मों में नाच-गाना इतना ज़रुरी क्यों है? इसके कुछ कारण हो सकते हैं। बॉलीवुड के शुरूआती दिनों में, इंडस्ट्री ने देखा कि दर्शक फ़िल्मों में नाच-गाना देखना चाहते थे, जैसा कि वो रंगमंच के अभिनय में देखते आये थे। सालों से, बॉलीवुड फ़िल्मों में सेक्सुअल दृश्य दिखाने के बजाय, दो किरदारों के बीच अंतरंग दृश्यों को दिखाने के लिए गानों का इस्तेमाल किया जाता है। आज के समय में, बॉलीवुड फ़िल्मों में अच्छे गाने रखना बहुत लाभदायक होता है। फ़िल्म के गाने इसका प्रचार करने का तरीका हो सकते हैं, और बॉलीवुड फ़िल्मों के लोकप्रिय गाने अक्सर सांस्कृतिक रूप से भी काफ़ी महत्वपूर्ण बन जाते हैं, जिन्हें शादियों और समारोहों में बजाया जाता है।

हालाँकि, हॉलीवुड को अक्सर दुनिया की फ़िल्म राजधानी माना जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण हैं कि दूसरे देशों की संस्कृतियों का उनकी फ़िल्मों और कहानी कहने की कला पर कैसा प्रभाव पड़ता है। कहानी कहने के सांस्कृतिक प्रभावों के बारे में जानने से आपको यह सोचने में मदद मिल सकती है कि आपकी ख़ुद की संस्कृति आपकी कहानी को कैसे प्रभावित करती है। अन्य संस्कृतियों से मिलने वाले सबक बहुत सारे शानदार विचार और प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।

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लिखने के लिए शुभकामनाएं!

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